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दीपावली पर पटाखे जलाते समय बरतें विशेष सावधानी, अग्नि सुरक्षा के नियमों का करें पालन

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पटाखा दुकानों में अग्निशमन यंत्र, पानी और रेत की व्यवस्था अनिवार्य, सुरक्षित दीपावली के लिए जारी किए गए जरूरी दिशा-निर्देश

रायगढ़, 5 नवम्बर 2026/ दीपावली का पर्व खुशियों, रोशनी और उत्साह का प्रतीक है। इस दौरान आतिशबाजी और पटाखों का उपयोग भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। हालांकि, थोड़ी सी लापरवाही आगजनी की बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। त्योहार के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पटाखा दुकानों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही पटाखे जलाते समय निर्धारित सावधानियों का पालन करना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से पटाखा कारोबारियों, दुकानदारों, अभिभावकों और आम नागरिकों को अग्नि सुरक्षा के नियमों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि दीपावली का पर्व सुरक्षित और खुशहाल वातावरण में मनाया जा सके।

पटाखा दुकानों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जरूरी

जिला सेनानी एवं जिला अग्नि शमन अधिकारी ने बताया कि पटाखों का कारोबार अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण दुकानों के निर्माण से लेकर विद्युत व्यवस्था और अग्निशमन संसाधनों तक विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। सुरक्षा के लिहाज से पटाखा दुकानें कपड़े, बांस, रस्सी, टेंट अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्री से निर्मित नहीं होनी चाहिए। दुकानों का निर्माण अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड में किया जाना चाहिए। इसके साथ ही दो पटाखा दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी रखना जरूरी है। दुकानों को एक-दूसरे के ठीक सामने भी नहीं बनाया जाना चाहिए, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में आग को फैलने से रोका जा सके और बचाव कार्य में परेशानी न हो।
दुकानों में प्रकाश व्यवस्था के लिए तेल के लैम्प, गैस लैम्प अथवा खुली बिजली बत्ती का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। विद्युत तारों के जोड़ खुले नहीं होने चाहिए तथा प्रत्येक मास्टर स्विच में फ्यूज या सर्किट ब्रेकर लगा होना चाहिए, जिससे शॉर्ट सर्किट होने की स्थिति में विद्युत प्रवाह स्वतः बंद हो सके। पटाखा दुकानें ट्रांसफार्मर के समीप नहीं होनी चाहिए और न ही उनके ऊपर से उच्च क्षमता वाली विद्युत लाइन गुजरनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी पटाखा दुकान से 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन प्रतिबंधित रखा जाना चाहिए।

हर दुकान में अग्निशमन यंत्र और पानी की व्यवस्था अनिवार्य

आगजनी की स्थिति में तत्काल नियंत्रण और बचाव के लिए प्रत्येक पटाखा दुकान में पांच किलोग्राम क्षमता का डीसीपी (ड्राई केमिकल पाउडर) अग्निशामक यंत्र उपलब्ध होना चाहिए। दुकानों के सामने निश्चित अंतराल पर 200 लीटर क्षमता वाले पानी के ड्रम रखे जाने चाहिए। साथ ही बाल्टियों में रेत भरकर रखनी चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर आग बुझाने में तत्काल इनका उपयोग किया जा सके। पटाखा दुकानों के सामने बाइक अथवा कार की पार्किंग नहीं होनी चाहिए। इससे आपातकालीन स्थिति में अग्निशमन वाहनों की आवाजाही बाधित हो सकती है। दुकानों के आसपास अग्निशमन विभाग और एम्बुलेंस के संपर्क नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किए जाने चाहिए। इसके अलावा अग्निशमन वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त खुला रास्ता रखना भी आवश्यक है, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किया जा सके।

पटाखे खरीदते समय गुणवत्ता और सुरक्षा का रखें ध्यान

आम नागरिकों को भी पटाखे खरीदने से लेकर उन्हें जलाने तक विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हमेशा लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें और यह सुनिश्चित करें कि पटाखे गुणवत्ता एवं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों। पटाखे जलाने के लिए घरों, वाहनों और ज्वलनशील पदार्थों से दूर किसी बड़े खुले मैदान का चयन करें। पटाखे जलाते समय पास में पानी से भरी बाल्टी अवश्य रखें, ताकि आकस्मिक आग लगने की स्थिति में तत्काल बचाव किया जा सके। पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनना अधिक सुरक्षित होता है, क्योंकि सिंथेटिक कपड़े आग की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें। उनकी निगरानी के लिए किसी जिम्मेदार वयस्क का साथ रहना जरूरी है। एक समय में एक ही पटाखा जलाएं और उसे जलाने के बाद पर्याप्त सुरक्षित दूरी बना लें। पटाखे जलाते समय हवा की दिशा का भी ध्यान रखें, ताकि चिंगारी किसी व्यक्ति, घर या आसपास रखी ज्वलनशील वस्तु की ओर न जाए। आतिशबाजी समाप्त होने के बाद इस्तेमाल किए गए पटाखों को पानी की बाल्टी में डालकर सुरक्षित तरीके से निपटान करें। इससे पटाखों में बची हुई चिंगारी से दोबारा आग लगने की आशंका समाप्त की जा सकती है।

इन गलतियों से बचें, छोटी लापरवाही बन सकती है बड़े हादसे का कारण

सुरक्षित दीपावली के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना भी जरूरी है। घर के अंदर, खिड़कियों के पास अथवा बंद स्थानों में पटाखे बिल्कुल न जलाएं। पटाखे जलाते समय ढीले या लटकने वाले कपड़े पहनने से बचें। पटाखों का उपयोग सूखी पत्तियों, गैस सिलेंडर, वाहनों और अन्य ज्वलनशील पदार्थों के आसपास न करें।
यदि कोई पटाखा जलाने पर नहीं फूटता है तो उसे दोबारा जलाने का प्रयास न करें। कुछ समय प्रतीक्षा करने के बाद उसे पानी में डालकर सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करें। ऐसे स्थानों पर पटाखे न जलाएं, जहां आग लगने की स्थिति में आपातकालीन निकास मार्ग बाधित हो सकता है। इसी तरह तेल के दीये और मोमबत्तियां जलाकर उन्हें कभी भी लावारिस न छोड़ें। विशेष रूप से पर्दों, कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के पास इन्हें जलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार की चोट अथवा जलने की घटना होने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें। बिना चिकित्सकीय मार्गदर्शन के घरेलू उपचार करने से बचें।

सतर्कता और जागरूकता से मनाएं सुरक्षित दीपावली

दीपावली का वास्तविक आनंद तभी है, जब खुशियों के इस पर्व पर हर परिवार सुरक्षित रहे। पटाखा कारोबारियों द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन, दुकानों में अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता और आम नागरिकों द्वारा आवश्यक सावधानियां बरतने से आगजनी की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए स्वयं भी सतर्क रहें और बच्चों सहित आसपास के लोगों को भी अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक करें, ताकि दीपावली का पर्व बिना किसी दुर्घटना के हर्षोल्लास और सुरक्षित वातावरण में मनाया जा सके।

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