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सच की बात है

कौशल्या बसोड़ ने कपड़ा दुकान और गन्ना मशीन व्यवसाय से तय किया ‘लखपति दीदी’ बनने का सफर

Bychattisgarhmint.com

May 5, 2026

लोईंग शिविर में सम्मानित होकर बनीं आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल

समाधान शिविर 2026ः संवाद से संपूर्ण समाधान की सशक्त पहल

रायगढ़, 5 मई 2026/ जिले में आयोजित समाधान शिविर केवल समस्याओं के निराकरण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की नई कहानियों का मंच भी बन रहा है। रायगढ़ विकासखंड के ग्राम लोईंग में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में स्थानीय महिला उद्यमी श्रीमती कौशल्या बसोड़ को ‘लखपति दीदी’ का प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया, जो उनके संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्रा का प्रतीक है। कभी सीमित संसाधनों और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच जीवन व्यतीत करने वाली कौशल्या ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया और ‘जय जगदम्बा’ स्व-सहायता समूह का गठन कर उसकी अध्यक्ष बनीं, जिससे उन्होंने स्वयं के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी सशक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
बिहान योजना के अंतर्गत प्राप्त वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन से कौशल्या ने छोटे स्तर से अपने व्यवसाय की शुरुआत की। उन्होंने सबसे पहले कपड़े की दुकान प्रारंभ की, जिससे नियमित आय का स्रोत बना। इसके बाद उन्होंने गन्ना रस निकालने की मशीन खरीदकर अपने उद्यम का विस्तार किया, जो क्षेत्र में लोकप्रिय व्यवसाय के रूप में स्थापित हुआ। आय में वृद्धि के साथ उन्होंने परिवहन क्षेत्र में भी कदम रखा और ऑटो खरीदकर उसे व्यावसायिक उपयोग में लगाया। इन विविध आय स्रोतों के माध्यम से उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई, जिससे वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहीं।
लोईंग में आयोजित समाधान शिविर में उन्हें ‘लखपति दीदी’ का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया, जो उनके आत्मविश्वास और उपलब्धि का महत्वपूर्ण पड़ाव है। कौशल्या बसोड़ का कहना है कि शासन की योजनाओं और बिहान के सहयोग से उन्हें नई पहचान मिली है तथा आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर पाई हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। समाधान शिविर में मिला यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय है। बता दे कि समाधान शिविर के माध्यम से प्रशासन और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित हो रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। यह पहल न केवल समस्याओं के निराकरण तक सीमित है, बल्कि आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम भी सिद्ध हो रही है।

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