चार पशु चिकित्सा की देखरेख में होता है स्वास्थ्य परीक्षण

रायगढ़। प्रतिदिवस विशेष शिविर लगाकर वहां के मवेशियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। डॉक्टर के परामर्श के अनुसार मवेशियों को हरा चारा, दाना, पैरा कुट्टी जैसे संतुलित आहार दिया जा रहा है।वर्तमान में संबलपुरी शहरी गौठान में रखकर 205 मवेशियों की देख रेख की जा रही है। कमिश्नर श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी ने संबलपुरी शहरी गौठान की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अधिकारियों को प्रति दिवस रोस्टर पर नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कर आयुक्त श्री चंद्रवंशी के समक्ष रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जा रही है। संबलपुरी शहरी गौठान में प्रति दिवस स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर मवेशियों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ उन्हें जरूरी इलाज जैसे इंजेक्शन, दवाइयां के साथ जरूरत पड़ने पर ड्रिप भी चढ़ाया जा रहा है। मवेशियों की देखरेख के लिए पशु चिकित्सा विभाग द्वारा चार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें डॉक्टर विजय सिंह, डॉक्टर गोपाल दास, डॉक्टर मनमोहन यादव, डॉक्टर संतराम बघेल सेवाएं देते हैं। इन डॉक्टरों द्वारा प्रति दिवस यहां के मवेशियों के स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही यहां के मवेशियों को हरा चारा, दाना पैरा कुट्टी का संतुलित आहार दिया जाता है। गौठान संचालन समिति के मैनेजर कृष्ण खुटे ने बताया कि वर्तमान में दाना, पैराकुट्टी की पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इससे यहां के मवेशियों को किसी तरह के खान-पान की दिक्कतें नहीं है। इसी तरह प्रति दिवस पास के ही चारागाह से हरा चारा की कटाई कर मवेशियों को हरा चारा भी दिया जा रहा है।————-प्लास्टिक खाने वाले मवेशियों की पाचन क्षमता प्रभावितगौठान में मवेशियों की स्वास्थ्य परीक्षण करने वाले चिकित्सकों ने बताया कि यहां लाए गए ज्यादातर मवेशी आवारा एवं गली, मोहल्ले में घूमने और प्लास्टिक झिल्ली खाने वाले होते हैं। गली मोहल्ले में मिल रहे सब्जी के छिलके बचे हुए खाने और प्लास्टिक झिल्ली खाने वाले मवेशियों का डाइजेशन सिस्टम खराब रहता है। इसलिए ऐसे मवेशियों को संतुलित आहार जैसे हरा चारा, दाना, पानी, पैरा कुट्टी आदि देने पर उसे जल्दी से पचा नहीं पाते हैं और डाइजेशन सिस्टम प्रभावित रहता है। ज्यादा मात्रा में प्लास्टिक झिल्ली खाने वाले मवेशियों के डाइजेशन सिस्टम को ठीक होने में समय भी लगता है। उन्होंने बताया कि यहां ज्यादा मात्रा में प्लास्टिक झिल्ली खाने वाले मवेशी ही बीमार पड़ रही हैं और उनकी मृत्यु भी हो रही है। मवेशियों के पोस्टमार्टम में बड़ी मात्रा में उनके पेट से प्लास्टिक की झिल्ली ही निकल रहा है। भूख या भोजन नहीं मिलने के कारण मवेशियों की मौत होने की बात सामने नहीं आई है।
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