वक्ताओं ने बताया धान के अलावा दलहन-तिलहन में किसान कैसे बनें आत्मनिर्भर
रायगढ़, 14 फरवरी 2026/ रेडियो किसान दिवस का आयोजन आज सारंगढ़ जिले के ग्राम परसाडीह में किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों, कृषि अधिकारियों ने किसानों को विभागीय योजनाओं के साथ कृषि में नवाचार की जानकारी दी। बताया गया कि धान में आत्मनिर्भर तो किसान हैं ही, अब वक्त आ गया है कि हमें दलहन तिलहन में आत्मनिर्भर बनना है। इस अवसर पर कृषि के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित डॉ.खूबचंद बघेल पुरस्कृत 6 कृषक रत्न पहुंचे, जिनका सम्मान आकाशवाणी परिवार की ओर से किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित कृषि अधिकारी और विशेषज्ञों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में नीरज प्रभाकर ने रेडियो किसान दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे सरकारी योजनाओं और किसानों के बीच आकाशवाणी सेतु का काम करता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन केवल चावल से ही हमारा जीवन नहीं चलता बल्कि उसके साथ हमें दाल की भी जरूरत पड़ती है। दाल हमारे पास है नहीं, इसलिए हमें देश के अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में अब वक्त आ गया है कि हम दलहन-तिलहन के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनें। कार्यक्रम में आकाशवाणी रायगढ़ किसानवाणी प्रभाग के सूत्रधार मुकेश चतुर्वेदी, दिलीप चौधरी, अजय श्रीवास, स्वतंत्र महंत, धवल गुप्ता, सुशील प्रधान और रामविलास पटेल मौजूद रहे।
इस अवसर पर उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि रेडियो संचार का एक सशक्त माध्यम है। जहां नेटवर्क समाप्त होती है वहां रेडियो सूचना पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने खेती किसानी को लेकर कहा कि अब जल संरक्षण को लेकर सबको जागरुक होने की जरुरत है। खेती किसानी का काम बिना पानी का पूरा नहीं हो सकता है, लेकिन दिनों-दिन गिरते जल स्तर इसके लिए आगे समस्या खड़ी कर सकती है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि ऐसे फसल का चुनाव करें जिसमें पानी कम खपत होती है। उप संचालक पशुधन विकास विभाग के डॉ महेंद्र पाण्डेय ने मवेशियों की हो रही कमी को लेकर चिंता जताई। श्री पाण्डेय ने कहा कि पशुओं को सड़क पर न छोड़ें बल्कि पालन-पोषण में दिक्कत हो रही है तो उसे गौ शालाओं में छोड़ दें, ताकि उसका संरक्षण हो सके। उन्होंने विभागीय योजनाओं की जानकारी और इसका फायदा लेने के लिए किसानों को आगे आने की बात कही। उन्होंने इन योजनाओं पर किसानों को मिलने वाली अनुदान की जानकारी दी।
उप संचालक मत्स्य विभाग नकुल ओगरे ने मछली पालन करके किसान अपनी आमदनी को किस तरह बढ़ा सकते हैं उसकी जानकारी दी। उन्होंने कई योजनाओं की जानकारी दिया जिसका लाभ लेकर किसान अपना मुनाफा बढ़ा सकते हैं। बड़े और छोटे तालाब का निर्माण किसान किस तरह से सरकारी योजना के माध्यम से कर सकते हैं इसकी जानकारी दी। केंद्रीय रेशम बोर्ड के वरिष्ठ तकनीकी सहायक मुरलीधर देवांगन ने तसर पालन से होने वाली आमदनी की जानकारी दी। उन्होंने कीट पालन के लिए जरुरी पौधे रोपने किस तरह से अनुदान ले सकते हैं उसकी जानकारी दी। एसडीओ कृषि हरीश राठौर ने उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद के इस्तेमाल से होने वाली नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने पीएम आशा के बारे में किसानों को बताया और इसके लिए कहां, कैसे पंजीयन करा सकते हैं इसकी जानकारी दी। केवीके के विषयवस्तु विशेषज्ञ केके पैंकरा ने बताया कि पहले जैसी जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर अब लौटना पड़ेगा। उनका कहना था कि प्राकृतिक खेती जमीन की सेहत और मनुष्य की सेहत के लिए जरुरी है। श्री पैंकरा ने जैविक और प्राकृतिक खेती की महत्ता किसानों को बताया। इसी तरह डॉ मनीषा चौधरी ने आहार और पोषण की जानकारी दी। कृषि अधिकारी और विशेषज्ञों ने जैविक और प्राकृतिक खेती पर जोर दिया।
कृषक रत्नों ने गौ पालन पर दिया जोर
रेडियो किसान दिवस कार्यक्रम में 6 कृषक रत्न भी पहुंचे थे। डॉ खूबचंद बघेल पुरस्कृत सभी कृषक रत्नों ने जैविक खेती के लिए किसानों को आगे आने की बात कही। इसके लिए सभी ने गौ पालन को बढ़ावा देने की बात कही। सभी कृषक रत्नों ने खेती में उन्नति का द्वार गौ पालन से ही खुलने की बात कही। डॉ खूबचंद बघेल पुरस्कार से सम्मानित किसान मुकेश चौधरी, खीरसागर पटेल, खेमराज पटेल, लक्ष्मण पटेल, डेढ़राज चंद्रा और एक मीडिया हाउस की ओर से भूंइयां के भगवान पुरस्कार से सम्मानित किसान श्याम पटेल भी मौजूद रहे। इन किसानों को रेडियो किसान दिवस के अवसर पर शॉल और मोमेंटो से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित रहे। महिला कृषकों की भागीदारी भी इस कार्यक्रम में रही।
रेडियो किसान दिवस पर कृषक रत्नों का सम्मानकिसानों को दी गई योजनाओं और कृषि में नवाचार की जानकारी
