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सुशासन तिहार ने लौटाई वरिष्ठजनों के चेहरे की मुस्कान

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सहायक उपकरण और पेंशन स्वीकृति से मिली संबल की नई उम्मीद

जनसमस्या निवारण शिविर बन रहे ग्रामीणों के लिए राहत और भरोसे का केंद्र

रायगढ़, 15 मई 2026/ उम्र के इस पड़ाव में जहां सहारे की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहां शासन की संवेदनशील पहल वरिष्ठजनों के जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास भर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रदेशभर में संचालित “सुशासन तिहार” अब केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि आमजन की उम्मीदों और विश्वास का उत्सव बन गया है। गांव-गांव आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों में लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है और पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम राजपुर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए यादगार अवसर बन गया। समाज कल्याण विभाग रायगढ़ द्वारा राजपुर के तेजराम पैंकरा व रामचंद्र चौहान एवं कुंपटिया पारा ढाप के सुखराम को सेटेबल वॉकिंग स्टिक प्रदान की गई। सहायक उपकरण पाकर हितग्राहियों के चेहरे पर संतोष, आत्मीयता और खुशी साफ दिखाई दी। वर्षों से दैनिक जीवन में होने वाली कठिनाइयों के बीच यह सहायता उनके लिए बड़ी राहत साबित हुई। वहीं सामाजिक सहायता कार्यक्रम अंतर्गत मुख्यमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत नलसाय पैंकरा, राय बहादुर बेहरा, मोहन बेहरा एवं विद्याधर पात्र को पेंशन स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही मुख्यमंत्री विधवा पेंशन योजना अंतर्गत देवमती पैंकरा को भी स्वीकृति पत्र सौंपा गया। पेंशन स्वीकृति मिलने से हितग्राहियों को आर्थिक संबल के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने का भरोसा मिला है।
राज्यसभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री श्री सत्यानंद राठिया एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ज्योति भगत सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा हितग्राहियों को सहायक उपकरण एवं पेंशन स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर एसडीएम लैलूंगा, जनपद पंचायत लैलूंगा सहित संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और जनता के बीच संवाद और विश्वास का रिश्ता और मजबूत हो रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं तथा अधिकारियों को त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दे रहे हैं। यही कारण है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ केवल कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर महसूस हो रहा है।

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