मनरेगा और NRLM के समन्वय से जिले के 28 क्लस्टरों में नए मॉडल तालाबों का होगा निर्माण
रायगढ़, 31 मार्च 2026। राज्य शासन के “मोर गांव, मोर पानी अभियान” के अंतर्गत के “मोर गांव, मोर पानी अभियान” के तहत रायगढ़ जिले में एक नई और महत्वाकांक्षी पहल “नवा तरिया, आय के जरिया” प्रोजेक्ट की शुरुआत की जा रही है। जिला पंचायत द्वारा मनरेगा (MGNREGA) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के समन्वय से इस योजना को नए वित्तीय वर्ष से जिले के सभी 7 विकासखंडों में लागू करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इस परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
योजना के तहत जिले के 28 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) में कम से कम एक-एक मॉडल तालाब का निर्माण किया जाएगा। इन तालाबों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने के लिए “रिज टू वैली” कॉन्सेप्ट अपनाया जा रहा है, जिसमें ‘Clart’ ऐप और युक्तधारा पोर्टल की मदद से स्थल चयन और योजना निर्माण किया जा रहा है। इससे कार्यों में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी, साथ ही भू-जल स्तर में सुधार की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि तालाबों का निर्माण मनरेगा के तहत किया जाएगा, लेकिन उनका उपयोग और प्रबंधन महिला स्व-सहायता समूहों (CLF) को सौंपा जाएगा। “नवा तरिया, आय के जरिया” थीम के अनुरूप इन तालाबों में मछली पालन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जल आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में लगातार बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में CLF से जुड़ी महिलाओं को तकनीकी जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें इस अभियान का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से यह योजना न केवल जल संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, “यह पहल जिले में विकास का एक मॉडल बनेगी, जहां जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण साथ-साथ आगे बढ़ेंगे और ‘नवा तरिया’ वास्तव में ‘आय का जरिया’ बनकर उभरेगा।”

