Site icon chattisgarhmint.com

यू ही नही बनता कोई धर्मेंद्र प्रधान 

आज मैं आपके सामने भारत के वर्तमान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल, शिक्षा व्यवस्था में हुए परिवर्तनों तथा उनसे जुड़े सार्वजनिक विमर्श पर अपने विचार एक लेख के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जो व्यक्ति बड़े बदलाव करने का प्रयास करता है, वह स्वाभाविक रूप से प्रशंसा और आलोचना—दोनों का सामना करता है। यह लोकतंत्र की शक्ति भी है और उसकी विशेषता भी। धर्मेंद्र प्रधान भी ऐसे ही नेताओं में गिने जाते हैं, जिनके कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं और जिन पर विभिन्न कारणों से व्यापक चर्चा होती रही है।

हाल के वर्षों में नीट परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद और विरोध देखने को मिला। जब किसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा में अनियमितताओं या पेपर लीक जैसी घटनाएँ सामने आती हैं, तो लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों की भावनाएँ प्रभावित होती हैं। ऐसे मामलों में सरकार, संबंधित संस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही की अपेक्षा करना स्वाभाविक है। साथ ही यह भी सच है कि भारत में परीक्षा संबंधी अनियमितताएँ केवल आज की समस्या नहीं हैं। अतीत में भी अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि इस समस्या का समाधान केवल किसी एक व्यक्ति को दोषी ठहराकर नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाकर किया जाए।

मेरा मानना है कि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनका उद्देश्य भारतीय शिक्षा को अधिक समावेशी, आधुनिक और भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप बनाना है। नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में उनके प्रयासों की अक्सर सराहना की जाती है।

विद्यालयी शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी उनके कार्यकाल के दौरान कई परिवर्तन किए गए। इतिहास और सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में संशोधन हुए, कुछ अध्याय हटाए गए और कुछ नए विषय जोड़े गए। समर्थकों का कहना है कि इन परिवर्तनों का उद्देश्य भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पक्षों, अनेक क्रांतिकारियों और भारत की विविध ऐतिहासिक विरासत को अधिक व्यापक रूप से प्रस्तुत करना था। वहीं आलोचकों का मत है कि इतिहास के किसी भी संशोधन में संतुलन, तथ्यपरकता और सभी दृष्टिकोणों का समुचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। लोकतंत्र में दोनों पक्षों की राय का सम्मान करना आवश्यक है।

ये नाम कोई साधारण नही बल्कि बहुत ही ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ और अडिग और असाधारण व्यक्ति का नाम है । जिसके पीछे आज सारी दुनिया सारी ताक़त सारी शक्ति सारा सिस्टम लगा होने के बावजूद कोई इनका एक बाल भी बाँका नही कर पा रहा  l आखिर क्यो पड़े सारे लोग धर्मेंद्र प्रधान के पीछे क्योकि नीट २०२६ का पेपर लीक हो गया या कोई और कारण है , क्या इससे पहले कोई पेपर लीक नही हुए । जहाँ तक मुझे याद है २००४ में CAT एग्जाम का पेपर लीक हुआ था उसके बाद आई आई टी जेईई का एग्जाम पेपर लीक हुआ, ना जाने कितने बाद नीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ पर लोगो को सिर्फ २०२६ का नीट परीक्षा ही याद है उसका विरोध करने लाखो लोग सामने आ गए । मध्य प्रदेश की मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में 40 वर्षो से धांधली चल रही उसका कुछ नहीं हुआ कितने अयोग्य लोग डॉक्टर बन कर रिटायर्ड भी हो चुके उसकी जाँच में कितने लोगो की जान गई । हुआ क्या सब भूल गए । और सब हाथ धो कर पीछे पड़ गए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के । राष्ट्रीय राजमार्ग और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अपने निठ्ठले बेटो के कारोबार को को चमकाने के लिए लाखो लोगो की मेहनत से कमाई हुई कारो का इंजन सीज करवा दिया उसके ख़िलाफ़ कोई प्रोटेस्ट नही कर रहा l गडकरी ने लाखो परिवार की खुशियों में गन्ना का रस मिलाकर बर्बाद कर दिया उसके खिलाफ कोई अनशन नही करेगा पर शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में पेपर लीक हो जाने पर सब उनके खिलाफ हो गए । दरअसल बात कुछ और है l शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जैसा कोई दूसरा मंत्री पूरी कैबिनेट में नही है । धर्मेद्र प्रधान बहुत ही ईमानदार और योग्य और दृढ़निश्चयी नेता है । आइए जानते है कैसे ।

पूरे देश में किसी की भी इतनी शक्ति नही कि कोई न्यायपालिका को चैलेंज कर सके पर ऐसा करने की हिम्मत सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान में है उन्होंने न्यायपालिका में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिश की ना केवल कोशिश की बल्कि एक पूरा अध्याय किताब में जुड़वा दिया ताकि न्यायपालिका में कितना भ्रष्टाचार है ये बच्चो बच्चो तक को पता चल सके वो बात और है की सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ताकत के दम पर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाला पूरा चैप्टर ही हटवा दिया और लिखने वाले के ऊपर कार्यवाही करके जेल भेज दिया ।

पचहतर सालो से पढ़ाया जा रहा था की अकबर महान है बाबर के युद्ध का वर्णन मुगलों का महिमामंडल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक ही झटके में पूरा मुगल इतिहास ही गायब करवा दिया  इतना ही नही उन्होंने गांधी को महान बताने वाला इतिहास भी हटवा दिया नेहरू को महान प्रधानमंत्री बताने वाले किताब ही हटवा दिया । गांधी ने चरखे और अहिंसा से आजादी दिलाई ये सब किताबो से किसने हटवाया जिस इतिहास की किताब में भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु,चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारी के चैप्टर किताबो में जुड़वाए । इतना ही नहीं शोषित वंचित वर्ग के लोग के लिए उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नियमों में संशोधन करके जाति आधारित होने वाले भेदभाव पर सख्त कानून बनाते हुए उसमे सजा का प्रावधान किया जिससेकलेजो में होने वाले जातिगत भेदभाव शोषण और अपराध को पूर्णतया रोका जा सके । अब आप ही बताइए इतने महान शिक्षामंत्री के खिलाफ कोई अनशन या कोई प्रोटेस्ट होना चाहिए या नही होना चाहिए या इनके द्वारा बनाये नियमो का सभी को पालन करना चाहिए ।

Exit mobile version