7 ग्राम पंचायतों में स्वीकृत हुए आधुनिक बकरी पालन शेड
रायगढ़, 13 जून 2026/ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत जिले की 7 ग्राम पंचायतों में लगभग 3 लाख रुपये प्रति इकाई की लागत से आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत किए गए हैं। यह पहल ग्रामीण परिवारों को पारंपरिक पशुपालन से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक पशुपालन की दिशा में प्रेरित करेगी।
बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से आजीविका का एक प्रमुख साधन रहा है, लेकिन उपयुक्त आवासीय संरचना और वैज्ञानिक प्रबंधन के अभाव में पशुपालकों को अक्सर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। नई योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से युक्त शेडों का निर्माण कर पशुपालकों को सुरक्षित एवं टिकाऊ पशुपालन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी आय और उत्पादन क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।
वैज्ञानिक मॉडल पर होगा निर्माण, पशुओं को मिलेगी मौसम और बीमारियों से सुरक्षा
स्वीकृत बकरी पालन शेडों का निर्माण वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप ऊंचे एवं सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। इससे पशुओं को वर्षा, जलभराव, अत्यधिक गर्मी तथा अन्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से सुरक्षा मिलेगी। शेडों में पर्याप्त वेंटिलेशन, स्वच्छ वातावरण, जल निकासी व्यवस्था और पशुओं के सुरक्षित रख-रखाव के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलने से पशुओं में संक्रमण और बीमारियों की संभावना कम होगी, जिससे उनकी मृत्यु दर में कमी आएगी। साथ ही पशुओं की वृद्धि दर, प्रजनन क्षमता तथा उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे पशुपालकों को पशुधन से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा और उनके व्यवसाय की स्थिरता बढ़ेगी।
एक ही परिसर में बकरी और देशी मुर्गी पालन, आय के खुलेंगे कई नए रास्ते
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे केवल बकरी पालन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एकीकृत आजीविका मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। आधुनिक बकरी शेडों के नीचे देशी मुर्गी पालन की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे एक ही परिसर में दो अलग-अलग आजीविका गतिविधियों का संचालन संभव हो सकेगा। बकरी पालन से जहां दूध, खाद एवं पशुधन बिक्री के माध्यम से आय प्राप्त होगी, वहीं देशी मुर्गी पालन से अंडा एवं मांस उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिलेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों को कम लागत में बहुआयामी आय स्रोत उपलब्ध होंगे। यह मॉडल विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा, क्योंकि इससे सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकेगा।
रोजगार, स्थायी परिसंपत्ति और आर्थिक सशक्तिकरण का बनेगा नया उदाहरण
योजना के अंतर्गत केवल संरचनाओं का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पशुपालकों को हरे चारे की उपलब्धता, संतुलित पूरक आहार, नियमित टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी। इससे पशुपालकों की दक्षता बढ़ेगी और वे अपने व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना सकेंगे। जिला प्रशासन द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों में कार्यों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मनरेगा के माध्यम से निर्मित यह एकीकृत बकरी एवं मुर्गी पालन मॉडल ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण, स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और सतत ग्रामीण विकास के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगी।

