इंजेक्शन अंतरा के बारे में दिया गया प्रशिक्षण
रायगढ़, 23 फरवरी 2024/ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आर.एन.मंडावी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन injectable contraceptive(Antra) विषय पर दो दिवसीय चिकित्सा अधिकारी, आर.एम.ए, सी.एच.ओ ,स्टाफ नर्स एवं ए.एन.एम., को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के आरोग्यम सभा कक्ष में मास्टर ट्रेनर डॉ दिनेश नायक एवं श्रीमती सुषमा लाल (स्टाफ नर्स) के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में इंजेक्शन अंतरा प्रसव पश्चात 45 दिन उपरांत इंजेक्शन अंतरा दो बच्चों के बीच अंतराल के लिये लगाया जाता है यह एक अस्थायी विधि है इसकी मात्रा 150 मि.ग्रा. हाथ/ कमर में त्वचा के नीचे लगाया जाता है इसकी डोज मात्रा 100 या 104एमजी 0.65एमएल हर तीन माह में 6 बार लगाया जाता है। इंजेक्शन अंतरा लगाने के बाद महावारी के चक्र को बंद कर माताए गर्भवती नही होती, गर्भधारण को रोका जा सकता है। इंजेक्शन अंतरा के प्रभाव से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (अस्थानिक गर्भावस्था) नही होती, सिकलसेल संकट को कम किया जा सकता है। बच्चेदानी में होने वाले गाँठ भी इंजेक्शन के प्रभाव, गर्भाश्य के अंदर होने वाले अण्डाश्य में होने वाले कैंसर को रोका जा सकता है। 7 से 10 माह में इंजेक्शन बंद होने के बाद गर्भधारण की क्षमता वापस आ जाती हे। पति-पत्नी मिलन के दौरान किसी प्रकार की बाधा नही होती 6 हफ्ते बाद दूध पिलाने वाली माताओं के दूध में किसी प्रकार की गुणवत्ता, मात्रा, रचना में कमी नही आती एवं शिशु स्वस्थ रहता है। इंजेक्शन अंतरा से माँ एवं बच्चे के अंतराल में स्वस्थ रहने का एक अच्छा उपाय है। इस संबंध में अभी तक 120 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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