पांडुलिपियाँ: हमारी पहचान, हमारा गर्व-संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
ज्ञान की विरासत को डिजिटल युग में सुरक्षित करने का संकल्प – जनभागीदारी से होगा संरक्षण
डिजिटल युग में सुरक्षित होगी हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा – जनसहभागिता से बढ़ेगा अभियान
सर्वेक्षण से संरक्षण तक-छत्तीसगढ़ में पांडुलिपि अभियान को नई गति
रायगढ़, 13 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है।
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन/नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रहकर्ता व्यक्तियों /संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।
पांडुलिपि संरक्षण में आगे आएँ: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का प्रदेशवासियों से आह्वान
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