• Wed. Jul 22nd, 2026

chattisgarhmint.com

सच की बात है

कृषि, पशुपालन और उद्यम से जुड़ी धरमजयगढ़ की महिलाएं अब स्थानीय बीजों और अनाजों से बना रहीं राखियां

Bychattisgarhmint.com

Jul 22, 2026

स्वसहायता समूहों की महिलाओं को मिला आजीविका का नया अवसर, पर्यावरण संरक्षण का भी दे रहीं संदेश

रायगढ़, 22 जुलाई 2026/ कृषि, पशुपालन और विभिन्न उद्यम गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहीं धरमजयगढ़ विकासखंड की महिलाएं अब स्थानीय बीजों और अनाजों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने रक्षाबंधन पर्व को आजीविका से जोड़ते हुए बीज राखियों का निर्माण शुरू किया है। स्थानीय संसाधनों से तैयार हो रही ये राखियां महिलाओं को अतिरिक्त आय का अवसर देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।
धरमजयगढ़ विकासखंड के आठ स्व-सहायता समूहों की महिलाएं विभिन्न प्रकार के बीजों और अनाजों से आकर्षक बीज राखियां तैयार कर रही हैं। इनमें बरबट्टी, मक्का, कुम्हड़ा, लौकी, करेला, सेमी, ग्वारफली, भिंडी, उड़द, मसूर, मूंगफली, धान और चावल जैसे स्थानीय बीजों का उपयोग किया जा रहा है। फेवीकोल, रंग, स्टीकर और धागे की सहायता से तैयार की जा रही ये राखियां आकर्षक होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। इन बीज राखियों की खासियत यह है कि रक्षाबंधन के बाद इन्हें मिट्टी में दबाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकते हैं। इस तरह ये राखियां भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक के साथ प्रकृति संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का माध्यम भी बनेंगी।
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत कोयलार की जय ठाकुरदेव स्व-सहायता समूह की सदस्य एवं कृषि सखी श्रीमती गणपति राठिया ने बताया कि समूह की महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विभिन्न बीजों से राखियां तैयार की हैं। उन्होंने बताया कि कृषि और अन्य आजीविका गतिविधियों के साथ अब समूह की महिलाएं त्योहारी आवश्यकताओं से जुड़े उत्पादों का निर्माण भी कर रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बीज राखी निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद जिले के विभिन्न विकासखंडों में स्व-सहायता समूहों द्वारा बीज राखियों का निर्माण किया जा रहा है। 20 जुलाई को जनपद पंचायत पुसौर, रायगढ़, धरमजयगढ़, खरसिया, तमनार एवं घरघोड़ा से प्राप्त स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा निर्मित बीज राखियों का चयन समिति द्वारा परीक्षण एवं मूल्यांकन किया गया।
धरमजयगढ़ में तैयार राखियों का पहला बैच जिले में भेजा जा चुका है और जल्द ही इनकी बिक्री प्रारंभ होगी। बिहान से जुड़ी महिलाएं कृषि, पशुपालन, लघु उद्यम सहित अन्य गतिविधियों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। बीज राखियों का निर्माण उनके लिए आजीविका के एक नए साधन के रूप में सामने आया है। स्थानीय संसाधनों से तैयार ये राखियां इस रक्षाबंधन रिश्तों की मिठास के साथ पर्यावरण संरक्षण और महिला आत्मनिर्भरता का संदेश भी देंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *