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डिजिटल नवाचार से ग्रामीण सशक्तिकरण की मिसालः रायगढ़ की 550 पंचायतों में ‘रोजगार सह आवास दिवस’ पर उमड़ा जनसैलाब


क्यू आर कोड से मोबाइल पर दिखा 5 वर्षों का विकास, 9 हजार से अधिक ग्रामीण बने डिजिटल सुशासन के सहभागी
आवास, रोजगार और आजीविका का समन्वित मॉडल, डबरी, मनरेगा और वीबी जी राम जी से मजबूत हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था

रायगढ़, 7 फरवरी 2026/ राज्य शासन एवं जिला प्रशासन की अभिनव पहल के तहत रायगढ़ जिले की सभी 550 ग्राम पंचायतों में आज ‘रोजगार सह आवास दिवस’ का व्यापक एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय कार्यक्रम ने ग्रामीण विकास को तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी से जोड़ते हुए शासन तथा प्रशासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी को उल्लेखनीय रूप से कम किया है।
          कार्यक्रम के दौरान पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति देखने को मिली। नौ हजार से अधिक ग्रामीणों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने गांव के विकास कार्यों की जानकारी सीधे अपने मोबाइल पर प्राप्त की।
क्यूआर कोड से पारदर्शी हुआ गांव का विकास
आयोजन का मुख्य आकर्षण डिजिटल सुशासन रहा। पंचायत परिसरों में उपलब्ध कराए गए क्यूआर कोड को स्कैन करते ही ग्रामीणों के मोबाइल पर उनके गांव की ‘एट अ ग्लांस रिपोर्ट खुल गई। इस रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों में मनरेगा के अंतर्गत हुए कार्यों का विस्तृत विवरण, साथ ही विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण योजना की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध रही। इस दौरान अपने गांव के विकास कार्यों को पारदर्शी रूप से मोबाइल स्क्रीन पर देखकर ग्रामीणों में उत्साह और विश्वास देखने को मिला।
आजीविका डबरी से आय के नए अवसर
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से डबरी निर्माण के महत्व पर विशेष फोकस किया गया। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि डबरी के माध्यम से जल संरक्षण, कृषि सिंचाई और मछली पालन जैसे कार्यों को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि संभव है। इसी क्रम में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विशेष पम्पलेट वितरण किया गया, ताकि प्रत्येक ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सके।
आवास और मनरेगा से जुड़े मुद्दों का मौके पर समाधान
रोजगार सह आवास दिवस’ के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मनरेगा से संबंधित जमीनी समस्याओं पर सीधा संवाद स्थापित किया गया। इसमें प्रमुख रूप से आवास निर्माण की किस्तों के भुगतान की स्थिति, प्रधानमंत्री आवास के साथ मिलने वाली मनरेगा की 90 दिवस की मजदूरी का समन्वय, निर्माण सामग्री की उपलब्धता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही ग्रामीणों को अवगत कराया गया कि आवास की समयबद्ध पूर्णता के लिए मनरेगा मजदूरी का भुगतान उनका अधिकार है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रशासन की प्रतिबद्धता
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिजीत पठारे ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य विकास की सभी कड़ियों को आपस में जोड़ना है। उन्होंने बताया कि जहां एक ओर पक्के आवास से सिर पर छत सुनिश्चित की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ‘आजीविका डबरी’ और वीबी जी राम जी के माध्यम से रोजगार और आजीविका की स्थायी गारंटी दी जा रही है। यह समन्वित मॉडल रायगढ़ जिले को डिजिटल, आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण विकास की दिशा में नई पहचान दिला रहा है।

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