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पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में ऐतिहासिक तेजी-समय पर भुगतान से विद्यार्थियों को मिला संबल


13,475 विद्यार्थियों को वितरित की गई 13 करोड रुपए से अधिक की छात्रवृत्ति
सुशासन में हर विद्यार्थी को अपने सपनों को साकार करने का मिल रहा समान अवसर

रायगढ़, 27 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे अनुसूचित जाति-एससी, अनुसूचित जनजाति-एसटी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग-ओबीसी के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना अब नई गति और पारदर्शिता के साथ लागू हो रही है। रायगढ़ जिले में इस योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप हजारों विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। अनुसूचित जाति के 2,261 विद्यार्थियों को 2,50,26,314 रुपए, अनुसूचित जनजाति के 4,309 विद्यार्थियों को 4,49,77,593 रुपए तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के 6,904 विद्यार्थियों को 6,05,53,292 रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस प्रकार कुल 13,475 विद्यार्थियों को 13 करोड़ 5 लाख 57 हजार 199 रुपए की छात्रवृत्ति राशि प्रदान की गई है। समय पर छात्रवृत्ति मिलने से विद्यार्थियों को फीस, अध्ययन सामग्री एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए अब किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे अपने शैक्षणिक लक्ष्यों की ओर अधिक एकाग्रता से अग्रसर हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को पूरी तरह सुदृढ़ किया गया है। शासन की मंशा के अनुरूप प्रक्रिया को समयबद्ध बनाते हुए तकनीकी नवाचारों को शामिल किया गया, जिससे विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र के दौरान ही छात्रवृत्ति की राशि प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट विजन है कि राज्य का हर प्रतिभाशाली विद्यार्थी समान अवसर पाए और कोई भी छात्र संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे। इसी दिशा में वर्ष 2025-26 में छात्रवृत्ति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया गया है। छात्रवृत्ति आवेदन से लेकर भुगतान तक प्रत्येक चरण के लिए निश्चित समय-सीमा तय की गई है। साथ ही विद्यार्थियों एवं संस्थाओं को अतिरिक्त अवसर प्रदान करते हुए आवेदन तिथियों में वृद्धि की गई, ताकि अधिकतम पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिल सके। तकनीकी नवाचारों के तहत पीएफएमएस के माध्यम से छात्रवृत्ति राशि सीधे विद्यार्थियों के आधार-सीडेड बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। इसके साथ ही जियो-टैगिंग एवं बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी व्यवस्थाओं से पूरी प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय एवं पारदर्शी बनाया गया है।

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