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राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम: 10 से 25 फरवरी तक घरघोड़ा एवं रायगढ़ में सामूहिक दवा सेवन अभियान

हाथीपांव से बचाव के लिए हर पात्र व्यक्ति का दवा सेवन जरूरी
जिला पंचायत सीईओ ने विभागीय समन्वय से शत-प्रतिशत कवरेज के दिए निर्देश

रायगढ़, 29 जनवरी 2026/ फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी से समाज को मुक्त करने की दिशा में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के  निर्देश  पर रायगढ़ जिले में 10 से 25 फरवरी 2026 तक व्यापक सामूहिक दवा सेवन अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान के दौरान विकासखंड घरघोड़ा और रायगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र लोइंग एवं शहरी क्षेत्र के 4 लाख 64 हजार 616 पात्र नागरिकों को डीओटी पद्धति के अनुसार दवा का सेवन कराया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2027 तक जिले सहित पूरे देश को फाइलेरिया मुक्त बनाना है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है तथा फाइलेरिया संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
      अभियान के प्रथम चरण में 10 से 12 फरवरी तक आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड एवं शहरी क्षेत्रों में बूथ लगाकर दवा सेवन कराया जाएगा। इसके पश्चात 13 से 22 फरवरी तक स्वास्थ्य कर्मी घर-घर पहुंचकर दवा खिलाएंगे। वहीं 23 से 25 फरवरी तक मॉप-अप राउंड में छूटे हुए व्यक्तियों को दवा सेवन कराया जाएगा। अभियान अवधि के दौरान सभी स्वास्थ्य संस्थानों में ओपीडी के पास बूथ संचालित रहेंगे तथा शहरी क्षेत्रों में मोबाइल टीमें भी तैनात रहेंगी। जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे ने संबंधित विभागों से आपसी समन्वय स्थापित कर अभियान को सफल बनाने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रहे।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ.टी.जी. कुलवेदी ने बताया कि फाइलेरिया रोग मच्छरों के माध्यम से फैलता है और प्रारंभिक अवस्था में इसका उपचार संभव है, लेकिन समय पर रोकथाम नहीं होने पर यह आजीवन विकलांगता का कारण बन सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि गर्भवती महिलाओं, 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी पात्र व्यक्ति दवा का सेवन स्वास्थ्यकर्मी के समक्ष अवश्य करें। उन्होंने कहा कि दवा का कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं है और इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि इस अभियान में शिक्षा विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग की सहभागिता से शत प्रतिशत दवा सेवन का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इस पूरे कार्य में स्वास्थ्य विभाग के 1659 दवा प्रशासकों (मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं स्वयं सेवी) के द्वारा दवा सेवन कराया जाएगा।

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