रुपडेगा की सुदामा रावत बनीं लखपति दीदी
किराना दुकान, मनिहारी, सिलाई और सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय से हर साल 3 लाख रुपये की आय
गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार और आत्मविश्वास की दिखा रहीं राह
रायगढ़, 23 जुलाई 2026/ कभी खेती-बाड़ी तक सीमित रहने वाली लैलूंगा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम रुपडेगा की श्रीमती सुदामा रावत की जिंदगी अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि अपने हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर लखपति दीदी बनने का गौरव भी हासिल किया।
सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य सुदामा रावत ने शुरुआत में समूह से मिली सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) का उपयोग खेती-बाड़ी के लिए किया। खेती से परिवार की जरूरतें तो पूरी हो जाती थीं, लेकिन उन्होंने यहीं रुकने के बजाय कुछ बड़ा करने का सपना देखा। इसी सोच ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। समूह के सहयोग और बैंक से मिले 5 लाख रुपये के मुद्रा ऋण के सहारे उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आज वे किराना दुकान के साथ मनिहारी सामग्री की बिक्री, सेंटरिंग प्लेट किराये पर उपलब्ध कराने तथा सिलाई सेंटर का सफल संचालन भी कर रही हैं।
मेहनत रंग लाई, बढ़ी आमदनी और आत्मविश्वास
सुदामा रावत की लगन और मेहनत का परिणाम यह है कि आज वे हर वर्ष लगभग 2 से 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। बच्चों की शिक्षा बेहतर हुई, स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ीं और परिवार का जीवन स्तर पहले की तुलना में काफी सुधरा है। अब गांव की कई महिलाएं उनसे प्रेरणा लेकर स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वे स्वयं भी महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, प्रशिक्षण लेने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया। आज वे अपने व्यवसाय का सफल संचालन करने के साथ-साथ गांव की महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देने का कार्य भी कर रही हैं।
बिहान ने बदली जिंदगी की तस्वीर
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने का काम कर रहा है। सुदामा रावत इसकी जीवंत मिसाल हैं। समूह से जुड़कर उन्होंने आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी और आज वे सम्मानजनक जीवन जीते हुए अपने गांव में नई पहचान बना चुकी हैं। सुदामा रावत कहती हैं, मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। नियमित बचत करें, प्रशिक्षण लें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करें। सरकार और समूह का सहयोग महिलाओं को लखपति दीदी बनने का अवसर देता है।
