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सच की बात है

दबड़े से निहारते मुर्गे अपनों की कत्ल, उन पर क्या बीतती होगी इतनी क्रूरता के साथ अपने साथी मुर्गे के सामने काटना बंद होनीलकांत खटकर

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Mar 11, 2026

सारंगढ़ बिलाईगढ़ 11 मार्च  2026/ हम आज उस बेजुबान के बारे में बात कर रहे हैं जो इंसान बड़े ही चाव के साथ खाते हैं। इसे जन्मदिन,वैवाहिक कार्यक्रम सहित कई पार्टियों में खूब परोसा जाता है। काश खाने के पहले एक बार इंसान सोचता कि इस मासूम को कैसे काटते होंगे इन पर क्या बीतती होगी जब साथी मुर्गे के सामने इसके सर धड़ से अलग किया जाता है खून तार तार किए जाते हैं। इन्हें गर्म पानी में डूबा कर मारना, मशीन चलाकर स्किन निकालना और टुकड़े टुकड़े कर देना इतनी क्रूरता के साथ इन्हें काटे जाते हैं फिर भी खाने वालों का दिल नहीं पजिस्ता। उसके साथी मुर्गे दबडे (मुर्गे रखने के पिंजरे ) से बाहर देखता रहता है कि उसके साथी को कितनी क्रूरता के साथ सामने टुकड़े टुकड़े करते हैं। मैं बीते दिनों बहुत करीब से चिकन दुकान जाकर इस दृश्य को देखा तो मेरी रूह कांप गई आप देखना चाहते हैं तो दबडे में रखे मुर्गों को देखना उनकी क्या हालत होती है। मैंने उस दिन देखा कि जब दबडे से दुकान वाला मुर्गा निकाल कर काटने लगे तो उसका साथी मुर्गे ने डरकर पेशाब और मल त्याग दिया तथा आंखों से आंसू निकल रहे थे।यह दृश्य देखकर मैं बहुत दुख हुआ और वहां से चला गया।मेरे मन में विचार आया कि कम से कम इस पर खबर बनाऊंगा।

यह क्रूरता मुर्गों के साथ ही नहीं बकरे, भेड़, सुअर, पक्षियों के साथ भी होता है और कत्लखानों में मवेशियों के साथ।ऐसे क्रूरता पर बस इतनी पाबंदी हो कि कम से कम दबडे को दूर रखा जाए साथी मुर्गों के सामने उनके टुकड़े टुकड़े नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए गाइडलाइन बनना चाहिए। प्रतिवर्ष हजारों करोड़ मुर्गे-मुर्गियाँ, बकरे, भेड़ ,सूअर मार दिए जाते हैं। स्थिति यह है कि लोग ‘मूली’ काटना और ‘मुर्गी’ काटना एक ही बात समझते हैं। इतनी अधिक मात्रा में इन्हें खाया जाने लगा है कि, लोग यह भूल चुके हैं कि मुर्गियाँ और ये जीव भी जीवित और हमारी ही तरह संवेदनशील प्राणी हैं।इन मासूमों पर होने वाले अत्याचारों की सूची लंबी है। कृत्रिम तरीक़े से पैदा करना, उन्हें अव्यवस्थित और गंदी जगहों पर रखना, कई तरह की दवाओं का ज़हर उनके शरीर में भर अप्राकृतिक तरीके से जल्दी-जल्दी बड़ा करना, और मात्र 40- 45 दिनों में ही उनकी गर्दन धड़ से अलग कर देना। इंसानों को केवल अपने स्वाद, अपने स्वार्थ से मतलब है। कृपया ऐसी अमानवीयता पर केवल 5 फीसदी इंसान विचार करते तो इनकी जान तो नहीं बचती लेकिन खुलेआम हो रही क्रूरता बंद हो जाती ।कृपया स्वयं को इन बेज़ुबानों के स्थान पर रखकर देखें। जिन्हें पैदा ही किया जाता है गर्दन पर छूरी चलाकर काटने के लिए । लालची इंसान भूख मिटाने के लिए इन बेजुबानों को क्रूरता पूर्वक काटता है एक बार आप भी करीब जाकर इनकी दशा देखेंगे तो आप इसे खाना बंद कर देंगे। कृपया जियें और जीने दें। आपमें थोड़ी इंसानियत हैं तो इन पर दया और मानवता दिखाएं।

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