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सच की बात है

26 वर्षों में शिक्षा का स्तर गर्त पर

Bychattisgarhmint.com

Jul 23, 2026

छत्तीसगढ़ के गठन के समय राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी शिक्षा व्यवस्था को खड़ा करना। दूर-दराज़ के इलाकों में विद्यालय तो थे, लेकिन प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी थी। ऐसे समय में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की सरकार ने शिक्षाकर्मी व्यवस्था लागू की, ताकि कम समय में स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था शुरू की जा सके। उस दौर में इस व्यवस्था को एक अस्थायी समाधान के रूप में देखा गया।

बाद के वर्षों में शिक्षाकर्मी संगठन मजबूत होते गए और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे। समय-समय पर विभिन्न सरकारों ने इन मांगों को स्वीकार किया, जिनमें सेवा शर्तों में सुधार और अंततः संविलियन जैसे फैसले भी शामिल रहे। समर्थकों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों को न्याय मिला, जबकि आलोचकों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता और जवाबदेही पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

राज्य में समय-समय पर कुछ शिक्षकों के अनुशासनहीनता, अनुपस्थिति या गंभीर कदाचार से जुड़े मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है और क्या दोषी पाए जाने वालों पर समयबद्ध कार्रवाई होती है। हालांकि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि कुछ मामलों के आधार पर पूरे शिक्षक समुदाय को कटघरे में नहीं खड़ा किया जा सकता, क्योंकि हजारों शिक्षक ईमानदारी से विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे हैं।

आलोचकों का मानना है कि यदि शिक्षा नीति में राजनीतिक हित, कर्मचारी संगठनों का दबाव और वोट बैंक की राजनीति हावी हो जाए, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, पारदर्शी भर्ती और कठोर जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना शिक्षा का स्तर सुधरना कठिन है।

आज विष्णुदेव साय सरकार के सामने अवसर है कि वह शिक्षा को राजनीतिक बहस से ऊपर उठाकर गुणवत्ता आधारित सुधारों पर ध्यान दे। यदि विद्यालयों की नियमित निगरानी, योग्यता आधारित नियुक्तियाँ, प्रशिक्षण, प्रदर्शन मूल्यांकन और अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाती है, तो छत्तीसगढ़ फिर से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है।

शिक्षा किसी भी राज्य के भविष्य की नींव होती है। इसलिए आवश्यक है कि सरकारें, शिक्षक संगठन, अभिभावक और समाज मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि रहे और शिक्षा राजनीतिक टकराव नहीं, बल्कि विकास का माध्यम बने।

शिक्षाकर्मियो का राजनीतिक सफ़र

सन 2000 में नया राज्य छत्तीसगढ़ बना प्रथम मुखमंत्री स्व. अजीत जोगी के सामने शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी, शिक्षको की बहुत कमी थी साथ में स्कूल भी बहुत कम थे l तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के सामने बहुत बड़ी चुनौती थी की इतने कम समय में इतने शिक्षक कहाँ से लाए । शिक्षको की भर्ती प्रक्रिया बहुत लंबी थी बीएड या डीएड  होना ज़रूरी था उसके बाद टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट पास करना पड़ता था फिर उसके बाद व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा में पास होना उसके बाद इंटरव्यू पास करना पड़ता था । पर इतनी लंबी प्रक्रिया करने में एक साल लग जाते इसलिए उन्होंने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया उन्होंने शिक्षा कर्मी नामक एक पोस्ट का ईजाद किया जिसके द्वारा तुरंत शिक्षा कर्मी की भर्ती की जा सकी उन्होंने हर स्तर पर शिक्षा कर्मी की भर्ती निकाली पंचायत स्तर से लेकर नगरीय निकाय तक पर उन्होंने कभी इन शिक्षा कर्मियो को शिक्षक का औधा नही दिया ना ही शिक्षा कर्मियो को शिक्षा विभाग में संवीलियन किया, क्योकि वो बहुत विजनरी मुख्यमंत्री थे वो बहुत अच्छे से जानते थे कि इन शिक्षाकर्मियो का स्तर क्या है । क्योकि ये शिक्षाकर्मी ना ही कोई कम्पेटिटिव परीक्षा पास किए ना टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट और ना ही इनके पास बी एड की डिग्री थी ये सब जनपद पंचायत सीईओ और नगर पालिका में पैसे देकर आये थे  । फिर आया वो दिन शिक्षाकर्मियो ने अपना असली रंग दिखाना शुरू किया ये सभी शिक्षाकर्मी संगठन बना कर अपनी माँग लेकर पहुँच गए रायपुर मुख्यमंत्री जी का घेराव करने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने इनका ऐसा दमन करवाया की इनकी सात पुस्ते भी याद रखेंगे, शिक्षाकर्मियो  को रायपुर से ऐसे खदेड़ा गया जैसे खेतो से जानवरो को फिर कभी ये शिक्षाकर्मी अजीत जोगी के कार्यकाल में कभी धरना प्रदर्शन करने नही पहुंचे l अगर ये कहा जाए की शिक्षा के क्षेत्र में मुखमंत्री अजीत जोगी जी का कार्यकाल स्वर्णिम युग था तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नही होगी वाकई में मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी का कार्यकाल शिक्षा के क्षेत्र मे स्वर्णिम युग था उन्होंने कितने सारे विद्यालय खोले कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोले जन जन तक शिक्षा को पहुंचाया और शिक्षा को सुलभ बनाया ।

उसके बाद आयी रमन सिंह की सरकार फिर क्या कहना रमन सिंह ने तो जैसे इन शिक्षाकर्मियो को गोद ले लिया हो  अब शिक्षाकर्मियो को लगने लगा जैसे राजनीति करने का कोई प्लेटफार्म मिल गया हो । रमन सिंह के कार्यकाल में शिक्षा कर्मियो का औधा जैसे जैसे बढ़ता गया छत्तीसगढ़ में शिक्षा का स्तर वैसे वैसे गिरता गया रमन सिंह सरकार ने हजारो नए स्कूल खोले पर उनमे पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नही क्योकि शिक्षाकर्मी की पोस्टिंग तो स्कूल में होती जरूर थी पर शिक्षाकर्मी वहाँ कभी जाता नहीं था । मुख्यमंत्री रमन सिंह और भूपेश बघेल ने शिक्षाकर्मियो बैठा के खिलाने का निर्णय किया । विद्यालयो का हाल ना कोई देखने वाला था ना कोई सुनने वाला वाला रमन सिंह सरकार ने धीरे धीरे शिक्षाकर्मी की सारी मांगे पूरी करने लगी , मांगे पूरी ना होने पर शिक्षाकर्मी आंदोलन करते हड़ताल करते l शिक्षाकर्मी को विद्याथियों के भविष्य से कोई लेना देना नही था उनको तो अपनी जेब भरना था । ये बात रमन सिंह और भूपेश बघेल दोनो को समझ में आ चुकी थी अब दोनो मुख्यमंत्री रमन सिंह और भूपेश बघेल को शिक्षा से कोई मतलब नही रहा l अब शिक्षाकर्मी रमन सिंह और भूपेश बघेल के लिए वोट बैंक बन चुके थे और रमन सिंह सरकार और भूपेश बघेल  सरकारे शिक्षाकर्मियों के लिए कमाई का साधन बन गए थे । ना ही सरकार को शिक्षा से कोई मतलब था और ना ही शिक्षाकर्मियो को विद्यार्थियों से कोई मतलब था शिक्षाकर्मी आंदोलन करते और अपनी बात दोनो मुखमंत्रियो से मनवा लेते । 

रमन सरकार और भूपेश सरकार ने शिक्षाकर्मियो के जेब भरने में भी कोई कसर नही छोड़ी बी आर सी और सी आर सी जैसे कई सरकारी नीतिया लेके आयी जिससे शिक्षाकर्मियो की आय में करोड़ो रूपये की वृद्धि हो गई । शिक्षाकर्मी भी ये जान चुके थे की वो कुछ भी करे पढ़ाये या ना पढ़ाये , स्कूल जाए या ना जाए रमन और भूपेश सरकार उनका कुछ नही बिगाड़ सकती । शिक्षाकर्मी  को पूरी आजादी मिल गई वो चाहे किसी छात्रा को छेड़े या उसके साथ अश्लील हरकते करे । स्कूल में शराब पीकर जाए या गाँजा पीकर जाए या फिर गुटखा खा कर वो अच्छी तरह समझ चुके थे कि रमन और भूपेश सरकार उन पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी । रमन सिंह और भूपेश बघेल की सरकार में शिक्षाकर्मियो का मनमाना प्रमोशन और मनमाना ट्रांसफ़र मिलने लगा । अब वो शिक्षाकर्मी से शिक्षक बन गए । और छत्तीसगढ़ मे शिक्षा का स्तर गिरते गिरते गर्त में पहुँच गया अगर अब की विष्णुदेव सरकार शिक्षा क्षेत्र में ध्यान नही देगी तो शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ आख़िरी पायदान में पहुँच जाएगा ।

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