कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला निवेश प्रोत्साहन समिति की बैठक संपन्न
रायगढ़, 29 जनवरी 2026/ कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में जिला निवेश प्रोत्साहन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने तथा सिंगल विंडो सिस्टम के अंतर्गत लंबित निवेश प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में ब्याज अनुदान, स्थायी पूंजी निवेश अनुदान, परियोजना प्रतिवेदन, उत्पादन प्रमाण-पत्र, मंडी शुल्क एवं स्टाम्प शुल्क छूट तथा मार्जिन मनी अनुदान से संबंधित लंबित प्रकरणों पर चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए गए। साथ ही लैंड बैंक, औद्योगिक भूमि उपलब्धता, निजी भूमि अर्जन एवं शासकीय भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने एमओयू निष्पादित इकाइयों तथा स्पंज आयरन एवं पावर प्लांट प्रतिनिधियों से संवाद कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके साथ ही सीएसआर गतिविधियों, जिला स्तर पर लंबित औद्योगिक स्वीकृतियों, एमओयू, इन्विटेशन टू इन्वेस्ट तथा अभिस्वीकृति पत्र प्राप्त इकाइयों की स्थापना में आ रही समस्याओं के समाधान पर चर्चा की गई।
कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने सीएसआर मद का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास एवं शासकीय योजनाओं के संतृप्तिकरण हेतु करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। साथ ही सीएसआर कार्यों का समुचित अभिलेख संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला निवेश प्रोत्साहन समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिस पर उद्योग प्रतिनिधियों ने सहमति व्यक्त की। कलेक्टर ने सभी उद्योग प्रतिनिधियों सेे कहा कि फ्लाई ऐश डंपिंग पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और अवैध डंपिंग की शिकायत मिलने पर संबंधित उद्योग के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अपर कलेक्टर डॉ. प्रियंका वर्मा, जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग की महाप्रबंधक सुश्री अंजू नायक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

Наркологическая помощь в стационаре — это шанс прервать замкнутый круг и сделать первый шаг к восстановлению. В стационаре рядом находится врач, средний медицинский персонал, медсестры и специалисты наркологии, которые контролируют пульс, давление, сон, реакции на препараты и динамику улучшения. Такой подход особенно важен при длительных запоях, когда организм человека уже истощен, а самостоятельный выход из запоя становится опасен для жизни.
Разобраться лучше – вывод из запоя в стационаре клиника геленджик