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    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की पहल से बदली मासूम की जिंदगी

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    Jul 7, 2026
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    समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार से दो वर्षीय देवांशु को मिली नई दृष्टि

    रायगढ़, 7 जुलाई 2026/ राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत समय पर की गई स्वास्थ्य जांच ने ग्राम बोडाझरिया के दो वर्षीय देवांशु बंजारा के जीवन में नई रोशनी भर दी। जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित इस मासूम की बीमारी की समय रहते पहचान होने से उसका सफल निःशुल्क ऑपरेशन संभव हो सका और अब वह सामान्य रूप से अपने आसपास की दुनिया को देख पा रहा है। ग्राम बोडाझरिया निवासी राजीव बंजारा के पुत्र देवांशु की आंखों की जांच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आरबीएसके टीम-बी पुसौर द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान की गई। जांच में बच्चे की आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) की पुष्टि हुई। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल रेफरल की प्रक्रिया पूरी कर विशेषज्ञ उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की।
    बीएमओ डॉ. विनोद नायक (शिशु विशेषज्ञ) एवं बीपीएम नवीन शर्मा के मार्गदर्शन में उपचार की संपूर्ण प्रक्रिया संचालित की गई। आरबीएसके टीम-बी पुसौर के टीम प्रभारी डॉ. संदीप भोई, डॉ. मंजू पटेल, कन्हैया किसान, सेवंती कुजूर तथा आशीष प्रधान ने बच्चे की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श, रेफरल एवं उपचार के प्रत्येक चरण में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद 7 जुलाई 2026 को नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मीना पटेल ने देवांशु का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद उसकी आंखों की रोशनी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब वह सामान्य रूप से दैनिक गतिविधियां कर पा रहा है। मासूम के चेहरे पर लौटी मुस्कान और परिवार की खुशी इस बात का प्रमाण है कि समय पर मिला उपचार किसी बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है।
    देवांशु के परिजनों ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर बीमारी की पहचान नहीं होती तो बच्चे की दृष्टि पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि निःशुल्क जांच, उपचार और चिकित्सकीय सहयोग ने उनके बच्चे को नई रोशनी और बेहतर भविष्य दिया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी समस्याओं, विकासात्मक विलंब एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।