सोना भट्ट ने कठिन परिश्रम करते हुए अपनी दोनो बेटियों को पढ़ाया और इस लायक बनाया कि वो अपने पैरो पर खड़े होकर घर की ज़िम्मेदारी सँभाल सके

सोना भट्ट की छोटी बेटी नेहा भट्ट जल संसाधन विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत है और बड़ी बेटी दीपिका भट्ट प्राथमिक स्वास्थ केंद्र लोइंग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर पदस्थ है

छोटे अतरमुड़ा निवासी सोना भट्ट ने कठिन परिश्रम करके अपनी दोनो बेटियों की परवरिश के साथ ही बेटियो की पढ़ाई के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नही करते हुए उन्होंने अपनी बेटीयो को अच्छे से पढ़ाया और अपनी बेटियो को काबिल बनाया सोना भट्ट सभी लोगो के लिए मिसाल पेश किया कि अगर आप बेटियो को पढ़ाया जाये तो वो भी शिखर तक पहुँच सकती है ।
सोना भट्ट सिंगल मदर होते हुए भी अपनी सारी जिम्मेदारी अच्छे से निभाई उन्होंने बिना हार माने कठिन परिश्रम किया छोटी बेटी नेहा की पढ़ाई (बी टेक ) कंप्लीट होने के बाद नेहा भट्ट की कई जगह से प्राइवेट जॉब के ऑफ़र मिले पर उनकी माँ सोना भट्ट ने किसी भी प्रकार की प्राइवेट नौकरी करने से इनकार कर दिया सोना भट्ट ने कहा कि तुम अपने एग्जाम की तैयारी करो आज नहीं तो कल जरूर सफलता मिलेगी और आज सोना भट्ट की बेटी जल संसाधन विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत है
सोना भट्ट घर घर जाकर साफ़ सफ़ाई और चौका बर्तन का काम करती थी एक बार की बात है उनके हाथ के अँगूठे में एक घाव हो गया था और वह अंदर ही अंदर पक चुका था फिर वह काम पर जाना नहीं छोड़ा और अपनी ड्यूटी करती रही वो हैंड ग्लव्स पहन कर काम करती रही उनका अंदरूनी घाव इतना बढ़ गया कि वो अंदर से बहुत पक चुका था और सड़ने के कगार में पहुँच गया था फिर भी वो का फिर भी वो काम करती रही फिर सभी के कहने पर सोना भट्ट ने कुछ दिनो की छुट्टी लेकर उस घाव का इलाज करवाया और ऑपरेशन करवा कर ठीक हुई और फिर से काम पर लौटी
सोना भट्ट के कठिन परिश्रम को देखते हुए आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सेंट्रल बैंक रायगढ़ के रिटायर्ड अधिकारियो द्वारा रायगढ़ के कमला नेहरू पार्क में एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे सोना भट्ट और उनकी बेटी नेहा भट्ट का सम्मान किया गया सर्वप्रथम सोना भट्ट को इमलिया भट्ट और शर्मिला श्रीवास्तव द्वारा पुष्प की माला पहना कर उन्हें साल भेंट दिया गया फिर प्रियंका वैश्य और उन्नति वैश्य द्वारा पुष्प गुच्छ भेंट किया गया उसके बाद कमलेश सिन्हा ,कमलेश जैन, शैलेश गुरु, समर चक्रवर्ती, डी के गरुआ, तरुणकांत घोष द्वारा पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया
