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    रागी की खेती से बदल रही लैलूंगा के किसानों की तकदीर

    Bychattisgarhmint.com

    Jun 11, 2026
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    ग्रीष्मकालीन धान छोड़ रागी की खेती की ओर बढ़े किसान, प्रशासन के सहयोग से मिली नई पहचान

    प्रशिक्षण, अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन सुविधा से बढ़ा किसानों का उत्साह

    रायगढ़, 11 जून 2026/ जिले में किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। लैलूंगा विकासखंड के किसान परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर अब रागी जैसी पौष्टिक और लाभकारी फसल को अपना रहे हैं। प्रशासन की पहल से आज क्षेत्र के किसान न केवल रागी का उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि इससे बेहतर आमदनी भी अर्जित कर रहे हैं।
    लैलूंगा के किसान बलार साय इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। दिसंबर 2025 में जिला प्रशासन द्वारा उन्हें अन्य किसानों के साथ बरगढ़ में रागी की उन्नत खेती का अध्ययन भ्रमण कराया गया था। भ्रमण के दौरान किसानों ने रागी उत्पादन, प्रबंधन और विपणन की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद बलार साय ने ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर रागी की खेती करने का निर्णय लिया। कृषि विभाग द्वारा उन्हें रागी उत्पादन का प्रशिक्षण, गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन तथा डीएमएफ मद से अनुदान सहायता उपलब्ध कराई गई। साथ ही खेतों में गुड़ाई एवं अन्य कृषि कार्यों के लिए कृषि उपकरण भी प्रदान किए गए। रागी विशेषज्ञ जेकब द्वारा किसानों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिससे खेती की तकनीकों को अपनाने में मदद मिली। आज बलार साय के खेतों में रागी की फसल पूरी तरह तैयार है और कटाई के लिए तैयार खड़ी है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसान भी रागी उत्पादन की ओर आकर्षित हुए हैं।
    वर्तमान में लैलूंगा क्षेत्र में लगभग 25 किसान खरीफ और ग्रीष्मकालीन मौसम को मिलाकर लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में रागी की खेती कर रहे हैं। इनमें खरीफ सीजन में लगभग 15 एकड़ तथा ग्रीष्मकालीन मौसम में लगभग 25 एकड़ क्षेत्र शामिल है। कृषि विभाग के अनुसार रागी की फसल से प्रति एकड़ औसतन 8 से 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में रागी का बाजार मूल्य लगभग 50 रुपये प्रति किलोग्राम है, जिससे किसानों को अच्छी आय प्राप्त हो रही है। किसानों की उपज के विपणन के लिए वन धन केंद्रों में खरीदी की व्यवस्था भी की गई है। वहीं बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पादित बीजों की खरीदी बीज निगम द्वारा किए जाने की व्यवस्था है। बलार साय के अलावा गोसाई राम राठिया, जोगी राम प्रधान, कलिंदर नायक, भवानी प्रसाद पंडा सहित अनेक किसान रागी उत्पादन से लाभान्वित हो रहे हैं।
    किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर दिए गए प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और विपणन सुविधाओं ने उन्हें नई फसल अपनाने का आत्मविश्वास दिया है। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलों तथा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इस पहल से किसानों को आर्थिक रूप से लाभ मिलने के साथ-साथ कृषि में दीर्घकालिक स्थिरता, जल संरक्षण तथा पोषणयुक्त फसलों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    4 thoughts on “रागी की खेती से बदल रही लैलूंगा के किसानों की तकदीर”
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